कृपया ध्यान दें: कुछ लिंक में जानकारी अंग्रेज़ी में हो सकती है।
हर दिन हम होलसेल और रिटेल बिज़नेस मॉडल का हिस्सा बनते हैं। इसके बावजूद, दोनों के बीच भ्रमित होना आसान है। ये कैसे काम करते हैं? आपके लिए सबसे अच्छा ईकॉमर्स बिज़नेस मॉडल कौन सा है? और क्या आप दोनों को मिलाकर बेहतरीन नतीजे पा सकते हैं?
ई-कॉमर्स में सफल होने के लिए होलसेल और रिटेल के बीच का अंतर जानना बेहद ज़रूरी है।
आगे, आप दोनों के बारे में वह सब कुछ सीखेंगे जो आपको जानना चाहिए। हम रिटेल बनाम होलसेल की तुलना करेंगे, मुख्य अंतर शेयर करेंगे, और आपके बिज़नेस के लिए सही संतुलन खोजने में आपका मार्गदर्शन करेंगे।
होलसेल और रिटेल के बीच क्या अंतर है?
होलसेल में डिस्काउंटेड कीमतों पर और बल्क में अन्य बिज़नेस को प्रोडक्ट बेचना शामिल है। रिटेल में रिटेल कीमत पर सीधे कंज़्यूमर को प्रोडक्ट बेचना शामिल है।
होलसेल और रिटेल के बीच अंतर समझाने का एक और तरीका बिज़नेस शब्दों "बिज़नेस-टू-बिज़नेस" (B2B) और "बिज़नेस-टू-कंज्यूमर" (B2C) का इस्तेमाल करना है।
- होलसेलर्स B2B हैं क्योंकि वे अन्य बिज़नेस को बेचते हैं।
- रिटेलर्स B2C हैं क्योंकि वे व्यक्तिगत कंज़्यूमर को बेचते हैं।
होलसेल कैसे काम करता है
होलसेलिंग में मैन्युफैक्चरर्स या डिस्ट्रीब्यूटर्स से बड़ी मात्रा में सामान खरीदना, उन्हें वेयरहाउस में स्टोर करना और फिर मुनाफे के लिए रिटेलर्स को दोबारा बेचना शामिल है।
होलसेलर्स एक बार में कम कीमत पर बहुत बड़ी मात्रा में इन्वेंट्री खरीदते हैं और फिर छोटी मात्रा में अधिक कीमत पर प्रोडक्ट बेचते हैं। उदाहरण के लिए, एक होलसेलर इस मैन्युफैक्चरर से 1,000 वॉटर बोतलें $2 प्रति बोतल की दर से खरीद सकता है। इसकी कुल लागत $2,000 होगी।
फिर होलसेलर 20 अलग-अलग रिटेलर्स को 50 वॉटर बोतलें $6 प्रति बोतल की दर से बेच सकता है, जो मूल खरीद मूल्य से तीन गुना है। अपने खर्चों जैसे वेयरहाउसिंग और डिलीवरी को घटाने के बाद, उन्हें मुनाफा मिलेगा।
कुल मिलाकर, होलसेलर्स:
- मैन्युफैक्चरर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से कम लागत पर बल्क में प्रोडक्ट खरीदते हैं।
- प्रोडक्ट के अंतिम उपयोगकर्ता को सीधे नहीं बेचते हैं।
- इन प्रोडक्ट्स को अन्य बिज़नेस को छोटी मात्रा में और खरीद मूल्य से अधिक कीमत पर दोबारा बेचते हैं।
रिटेल कैसे काम करता है
एक रिटेलर होलसेलर, मैन्युफैक्चरर या डिस्ट्रीब्यूटर से बल्क में सामान खरीदता है और उन्हें अंतिम यूज़र को बेचता है। वे सप्लाई चेन में अंतिम बिज़नेस होते हैं।
इसलिए जब भी आप एक कंज़्यूमर के रूप में अपने इस्तेमाल के लिए कुछ खरीदते हैं, तो आप एक रिटेलर से खरीदते हैं। इसमें किराना स्टोर, हार्डवेयर स्टोर और कपड़ों की दुकान शामिल हैं। इसके अलावा, रिटेलर्स आमतौर पर प्रोडक्ट व्यक्तिगत रूप से बेचते हैं।
उदाहरण के लिए, एक रिटेलर एक होलसेलर से 100 घड़ियाँ $20 प्रत्येक की दर से खरीद सकता है और उन्हें कंज़्यूमर को $55 प्रत्येक की दर से बेच सकता है।
आसान शब्दों में, रिटेलर्स:
- होलसेलर या डिस्ट्रीब्यूटर से बल्क में सामान खरीदते हैं।
- अंतिम यूज़र को व्यक्तिगत रूप से प्रोडक्ट मार्केट और बेचते हैं।
- कस्टमर एक्सपीरियंस पर पूरा नियंत्रण रखते हैं।
तुलना: होलसेल बनाम रिटेल
| अंतर | होलसेल | रिटेल |
|---|---|---|
| टारगेट ऑडियंस | बिज़नेस | कंज़्यूमर |
| खरीद प्रक्रिया | लंबी और कई स्टेकहोल्डर्स शामिल | छोटी और एक या दो निर्णयकर्ता शामिल |
| मूल्य निर्धारण | प्रति यूनिट कम लागत: लगभग 15% से 30% प्रॉफिट मार्जिन | प्रति यूनिट अधिक लागत: होलसेल कीमत पर लगभग 30-50% प्रॉफिट |
| ट्रांजेक्शन वॉल्यूम | नियमित बल्क ऑर्डर | सिंगलर प्रोडक्ट |
| इन्वेंट्री स्टोरेज | बड़े वेयरहाउस जो सुरक्षा और बल्क लोडिंग/अनलोडिंग पर फोकस करते हैं | रिटेल स्टॉकरूम और इन-स्टोर शेल्विंग यूनिट |
| प्रोडक्ट रेंज | बड़ी मात्रा में कम प्रोडक्ट | कम मात्रा में अधिक प्रोडक्ट |
| ऑपरेटिंग कॉस्ट | लॉजिस्टिक्स और फुलफिलमेंट | ईकॉमर्स के सभी पहलू: शिपिंग और फुलफिलमेंट, कस्टमर सर्विस, मार्केटिंग, आदि। |
| फुलफिलमेंट और शिपिंग | बड़े बॉक्स साइज़ के कारण अधिक शिपिंग फीस | तेज़ और किफायती शिपिंग |
| लोकेशन | ट्रांसपोर्टेशन लिंक के पास (जैसे एयरपोर्ट और हाईवे) | हाई स्ट्रीट और शॉपिंग मॉल |
| पेमेंट टर्म्स | इनवॉइस बिलिंग और क्रेडिट वेरिफिकेशन | तुरंत चेकआउट |
टारगेट ऑडियंस
होलसेल कस्टमर्स बिज़नेस की ओर से प्रोडक्ट खरीदते हैं, आमतौर पर अपने स्टोर में अधिक मार्कअप पर दोबारा बेचने के लिए। होलसेल बिज़नेस की टारगेट ऑडियंस बहुत समान होती है। वे मर्चेंडाइजिंग, बायिंग या स्टोर मैनेजर हो सकते हैं। उनका लक्ष्य खरीदी गई इन्वेंट्री को दोबारा बेचकर मुनाफा कमाना है।
हालांकि, रिटेल ब्रांड अंतिम कस्टमर को बेचते हैं। उनकी चुनौतियाँ और खरीद प्रेरणाएँ नाटकीय रूप से अलग हो सकती हैं, खासकर अगर किसी प्रोडक्ट के कई इस्तेमाल हों।
हम इसे स्किनकेयर प्रोडक्ट बेचने वाले दो ब्रांड्स में देख सकते हैं। होलसेल कस्टमर हाई क्वालिटी वाले प्रोडक्ट सुरक्षित करना चाहता है जिन पर वे मुनाफा कमा सकें, जबकि रिटेल कस्टमर अपने मुँहासे कम करना और अपनी त्वचा की नमी बढ़ाना चाहता है।
खरीद प्रक्रिया
होलसेल खरीद प्रक्रिया अधिक औपचारिक होती है। ट्रांजेक्शन में कॉन्ट्रैक्ट, चल रही बातचीत और परचेज़ ऑर्डर शामिल होते हैं। सामान की उच्च मात्रा और मूल्य को देखते हुए, स्पष्ट शर्तें, कीमतें, डिलीवरी शेड्यूल और पेमेंट कंडीशन सेट करने पर अधिक जोर दिया जाता है। औसत B2B खरीद निर्णय में आठ स्टेकहोल्डर्स शामिल होते हैं।
रिटेल खरीदारी अधिक सीधी होती है। कस्टमर्स, चाहे ऑनलाइन खरीदारी करें या रिटेल स्टोर में, वे जो चाहते हैं उसे चुनते हैं और उसके लिए पेमेंट करते हैं। आमतौर पर सिर्फ़ एक निर्णयकर्ता होता है (दो अगर वे किसी के साथ आइटम शेयर कर रहे हों)। फोकस स्पीड और सुविधा पर होता है, जिसका मतलब Shop Pay (शॉप पे) जैसे पसंदीदा तरीके से भुगतान करना हो सकता है।
मूल्य निर्धारण और प्रॉफिट मार्जिन
होलसेल और रिटेल बिज़नेस दोनों एक कीमत पर प्रोडक्ट खरीदकर और अधिक कीमत पर बेचकर पैसा कमाते हैं। इसे "मार्कअप" कहा जाता है।
खर्चों का भुगतान करने और मुनाफा कमाने के लिए कॉस्ट प्राइस में मार्कअप जोड़े जाते हैं। कॉमर्स सप्लाई चेन में हर स्टेप में सामान की लागत बढ़ाता है। इसे "कीस्टोन मार्कअप" के रूप में जाना जाता है। यह तब होता है जब प्रोडक्ट को 50% तक मार्क अप किया जाता है। इसका मतलब है कि प्रोडक्ट खरीदे जाने की तुलना में दोगुना महंगा है।
कई बिज़नेस इस रणनीति को होलसेल और रिटेल प्राइसिंग रणनीतियों के लिए बेसलाइन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, हालांकि कोई कठोर नियम नहीं है। आम तौर पर:
- होलसेलर्स के पास 15-30% प्रॉफिट मार्जिन होते हैं
- रिटेलर्स होलसेल कीमत पर 30-50% मार्कअप जोड़ते हैं
ट्रांजेक्शन वॉल्यूम
होलसेलर्स कम डील्स में बड़ी मात्रा में प्रोडक्ट संभालते हैं, जिनमें से प्रत्येक की कीमत महत्वपूर्ण होती है। वे कम फ्रीक्वेंसी कस्टमर्स के लिए लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और स्टोरेज को कुशलतापूर्वक मैनेज करने में विशेषज्ञ होते हैं। प्रत्येक ट्रांजक्शन के उच्च मूल्य के कारण किसी प्रमुख क्लाइंट को खोना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दूसरी ओर, रिटेलर्स छोटे, अधिक व्यक्तिगत ट्रांजेक्शन में विशेषज्ञ होते हैं। जबकि प्रति ट्रांजेक्शन मूल्य कम होता है, कलेक्टिव मूल्य महत्वपूर्ण होता है। तेज़ इन्वेंट्री टर्नओवर और सहज कस्टमर एक्सपीरियंस के लिए कुशल इन्वेंट्री मैनेजमेंट और पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) सिस्टम की ज़रूरत होती है। इतने बड़े कस्टमर बेस के साथ, उनकी सप्लाई चेन में कोई भी समस्या कई व्यक्तिगत बिक्री को प्रभावित कर सकता है।
Shopify (शॉपिफ़ाई) के कॉमर्स ऑपरेटिंग प्लेटफॉर्म के साथ अपने इन्वेंट्री डेटा को इंटीग्रेट करें, चाहे आप होलसेल बेच रहे हों या रिटेल। अपने पूरे बिज़नेस डेटा के लिए एक 'सिंगल सोर्स ऑफ़ ट्रुथ' पाएं, ताकि आप स्टॉक खत्म होने की समस्या से बच सकें और बेहतर बिज़नेस फैसले ले सकें.
इन्वेंट्री स्टोरेज और वेयरहाउसिंग
अधिकांश होलसेलर्स के पास बड़े वेयरहाउस होते हैं, जहाँ भारी मात्रा में स्टॉक रखा जाता है। इन सुविधाओं में दिखावे से ज़्यादा काम करने की क्षमता, सुरक्षा और माल को आसानी से लाने-ले जाने पर ध्यान दिया जाता है, ताकि बड़ी मात्रा में इन्वेंट्री को मैनेज किया जा सके।
रिटेलर्स के लिए, स्टोरेज बैक रूम और स्टॉकरूम के बीच बंटा होता है। होलसेल वेयरहाउस से छोटे होने के बावजूद, स्टॉकरूम को शॉप फ्लोर पर स्टॉक को जल्दी से फिर से भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है। शॉप फ्लोर पर शेल्फ और रैक स्टोरेज का मुख्य उद्देश्य सामान को आकर्षक तरीके से दिखाना और ग्राहकों के लिए उसे आसान बनाना होता है।
प्रोडक्ट की रेंज
होलसेलर्स आमतौर पर कम प्रोडक्ट स्टॉक करते हैं लेकिन बड़ी मात्रा में। वे रिटेलर्स या अन्य बिज़नेस को विशिष्ट आइटम की बल्क मात्रा की सप्लाई पर ध्यान देते हैं।
रिटेलर्स ग्राहकों की अलग-अलग पसंद को ध्यान में रखते हुए प्रोडक्ट्स की बड़ी रेंज रखते हैं। उनका स्टॉक अक्सर बदलते ट्रेंड्स, कस्टमर फीडबैक और मार्केट रिसर्च पर आधारित होता है।
चूंकि रिटेलर्स खरीदारी के सफर का आखिरी पड़ाव होते हैं, इसलिए उन्हें हर ग्राहक की पसंद और जरूरत के हिसाब से ढेरों विकल्प देने पड़ते हैं। यही वजह है कि उनके पास अक्सर अलग-अलग ब्रांड, स्टाइल, रंग, साइज और फ्लेवर की बड़ी वैरायटी होती है।
ऑपरेटिंग कॉस्ट
होलसेलिंग में खर्चे कम और ट्रैक करना आसान होता है। यहाँ सारा ध्यान बड़े क्लाइंट्स, वेयरहाउसिंग और शिपिंग पर होता है।
इसके विपरीत, रिटेलर्स के लिए मार्केटिंग, ब्रांडिंग और कस्टमर सर्विस सबसे ज़रूरी होती है। हालांकि, इन्वेंट्री, कैश फ्लो और स्टाफ मैनेजमेंट दोनों ही तरह के बिज़नेस के लिए ज़रूरी है।
ऑर्डर फुलफिलमेंट और शिपिंग
होलसेल (B2B) में ग्राहक भारी मात्रा में सामान खरीदते हैं, इसलिए आपको बड़े वेयरहाउस और पेचीदा शिपिंग लॉजिस्टिक्स की ज़रूरत होती है। यहाँ शिपिंग चार्ज वजन और साइज पर निर्भर करते हैं, जिसे अक्सर प्रॉफिट बचाने के लिए ग्राहकों से ही लिया जाता है।
वहीं, रिटेलर्स छोटे ऑर्डर्स भेजते हैं, जिससे शिपिंग का खर्च कम रहता है। आप 'फ्री शिपिंग' देने के लिए इस खर्च को प्रोडक्ट की कीमत में ही जोड़ सकते हैं।
स्टोरेज के मामले में भी रिटेलर्स को कम जगह चाहिए होती है, अगर आपकी रोज़ाना की सेल 15 यूनिट है, तो आपको हज़ारों के बजाय सिर्फ 500 यूनिट्स का स्टॉक रखना काफी होगा।
लोकेशन
लोकेशन का महत्व दोनों के लिए अलग है। रिटेलर्स को ऐसी प्राइम जगहों (जैसे मॉल या हाई-स्ट्रीट) पर होना चाहिए जहाँ ग्राहकों की भीड़ ज़्यादा हो, भले ही वहां का किराया बहुत अधिक हो।
वहीं, होलसेलर्स को बड़े स्टोरेज और आसान लॉजिस्टिक्स की ज़रूरत होती है। उनके लिए ऐसी जगह चुनना फायदेमंद है जो हाईवे, एयरपोर्ट या बड़े ट्रांसपोर्ट हब के नज़दीक हो, ताकि आपकी शिपिंग स्ट्रैटिजी के हिसाब से खर्च कम और ट्रांसपोर्ट आसान रहे।
पेमेंट टर्म्स
होलसेल और रिटेल में पेमेंट का तरीका काफी अलग होता है। जहाँ होलसेल में बिलिंग और लंबी पेमेंट डेडलाइन (Credit) चलती है, वहीं रिटेल में तुरंत पेमेंट पर ज़ोर दिया जाता है।
होलसेल के तरीके:
- नेट 30, नेट 60 इनवॉइस बिलिंग ताकि बिज़नेस डिलीवरी के बाद पेमेंट कर सकें।
- गैर-भुगतान जोखिम को कम करने के लिए क्रेडिट चेक और ट्रेड रेफरेंस।
- जल्दी पेमेंट करने पर छूट।
- वॉल्यूम-आधारित शर्तें जैसे ज़्यादा माल लेने पर बेहतर दाम और समय।
रिटेल के तरीके:
- कस्टमर्स क्रेडिट कार्ड या डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करके खरीद के समय पेमेंट करते हैं।
- ज़्यादा कीमत वाले आइटम के लिए अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें विकल्प।
Shopify Payments Shopify का अपना पेमेंट सिस्टम है जो स्टोर मालिकों को अपने स्टोर पर सीधे B2B और B2C पेमेंट विकल्प स्वीकार करने देता है, बिना अलग पेमेंट सर्विस सेट अप किए।
आपका बिज़नेस कहाँ मौजूद है, इसके आधार पर कस्टमर्स मुख्य क्रेडिट कार्ड, डिजिटल वॉलेट (जैसे Apple Pay, Google Pay, Shop Pay), और विशिष्ट देशों में लोकप्रिय पेमेंट विधियों से पेमेंट कर सकते हैं।
होलसेल कब सबसे अच्छा है?
आपके पास बेहतरीन रिलेशनशिप-बिल्डिंग स्किल्स हैं
होलसेल में सफलता पूरी तरह मजबूत बिज़नेस रिलेशनशिप पर टिकी होती है। यहां आप कम ग्राहकों के साथ काम करते हैं, लेकिन उनके साथ गहरी पार्टनरशिप विकसित करते हैं जिससे लंबे समय तक फिक्स्ड इनकम सुनिश्चित होती है। हालांकि, इन रिश्तों को बहुत भरोसे के साथ बनाना पड़ता है, क्योंकि एक भी बड़े क्लाइंट का साथ छोड़ना आपके बिज़नेस को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
आप कम, उच्च-मूल्य की बिक्री करना पसंद करते हैं
होलसेल मॉडल ढेरों छोटी बिक्री के बजाय स्थापित खरीदारों के साथ बड़े लेन-देन पर केंद्रित होता है। इसका मतलब है कि आप नए ग्राहक खोजने में कम और ऑपरेशन्स व डिलीवरी को बेहतर बनाने में ज़्यादा समय बिताते हैं। हालांकि, यहाँ हर सेल में बारीकियों पर ध्यान देना ज़रूरी है, चाहे वह इन्वेंट्री संभालना हो या ऑर्डर मैनेज करना क्योंकि इस बड़े स्तर पर एक छोटी सी गलती भी काफी महंगी पड़ सकती है।
प्रो टिप: Shopify की B2B सुविधा हर होलसेल ग्राहक के लिए पर्सनलाइज्ड अकाउंट्स बनाकर उन्हें आपके साथ जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करती है। इससे खरीदार अपने पुराने ऑर्डर्स देख सकते हैं, पेमेंट कार्ड सेव कर सकते हैं और सेल्स टीम से बात किए बिना सीधे और आसानी से दोबारा ऑर्डर कर सकते हैं।
Dermalogica Canada (डर्मालॉजिका कनाडा) के एसोसिएट ईकॉमर्स डायरेक्टर निकोलस लछमन ने कहा, पहले ग्राहक हमारे प्लेटफॉर्म से इतने परेशान रहते थे कि वे फोन पर ऑर्डर देना बेहतर समझते थे। लेकिन अब, अनुभव इतना आसान हो गया है कि वे अपने मोबाइल से ही हजारों डॉलर के प्रोडक्ट्स का ऑर्डर बड़े आराम से दे रहे हैं।
लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते और बार-बार मिलने वाले ऑर्डर्स बिजनेस को सुरक्षा और स्थिरता देते हैं, जिससे बिक्री और मुनाफे का सही अंदाजा लगाना आसान हो जाता है।
हालांकि, आपको अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखने चाहिए। किसी एक बड़े क्लाइंट के साथ रिश्ता खराब होना या उसका बिजनेस बंद होना, रातों-रात आपकी कमाई को बड़ा झटका दे सकता है।
रिटेल कब सबसे अच्छा है?
आप मार्केटिंग में बेहतरीन हैं
रिटेल में सफलता पाने के लिए बेहतरीन मार्केटिंग और कस्टमर एंगेजमेंट की ज़रूरत होती है। आपको न केवल नए ग्राहकों को जोड़ना होता है, बल्कि पुराने ग्राहकों का भरोसा भी बनाए रखना पड़ता है। यह बिजनेस मॉडल प्रमोशन, मर्चेंडाइजिंग और कस्टमर एक्सपीरियंस में क्रिएटिविटी को महत्व देता है।
कड़े कॉम्पिटिशन के बीच अलग पहचान बनाने के लिए अपने ब्रांड की कहानी को प्रभावशाली ढंग से पेश करना और ग्राहकों को खरीदारी का एक शानदार अनुभव देना बेहद ज़रूरी है।
यह मॉडल आपको अपनी पसंद के मार्केटिंग कैंपेन के साथ प्रयोग करने की पूरी क्रिएटिव आजादी देता है, जिससे आप सही ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं और स्टोर या वेबसाइट पर उनकी संख्या बढ़ा सकते हैं। साथ ही, प्रोडक्ट्स को अलग-अलग बेचने से आपको अपसेलिंग, क्रॉस-सेलिंग और बंडलिंग के ढेरों मौके मिलते हैं, जिससे आप अपने मुनाफे को और भी ज़्यादा बढ़ा सकते हैं।
आप अधिक नियंत्रण चाहते हैं
रिटेल आपको इस बात पर पूरा नियंत्रण देता है कि ग्राहक आपके ब्रांड को कैसे महसूस करते हैं। प्रोडक्ट की सजावट से लेकर उसकी कीमत तय करने तक, हर फैसला आपके हाथ में होता है। यह कंट्रोल कस्टमर सर्विस, स्टोर के माहौल और मार्केटिंग मैसेज तक फैला होता है, जिससे आप अपने ब्रांड की एक मजबूत और एक जैसी पहचान बना पाते हैं।
यह उसगह पर लागू होता है जहाँ आपके प्रोडक्ट बेचे जाते हैं। Shopify POS जैसे दमदार सिस्टम के साथ, आप इन-पर्सन, फोन पर या ऑनलाइन, हर जगह से लेन-देन को एक ही प्लेटफॉर्म पर मैनेज कर सकते हैं। इस एकीकृत तरीके का मतलब है कि आपकी इन्वेंट्री, ग्राहकों का डेटा और सभी ट्रांजेक्शन अपने आप हर जगह अपडेट हो जाते हैं, जिससे खरीदारी का अनुभव हर जगह एक जैसा रहता है।
आप हाई प्रॉफिट मार्जिन चाहते हैं
होलसेलर्स हर यूनिट पर कम मुनाफा कमाते हैं क्योंकि उनका पूरा बिजनेस 'इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल' (बड़ी मात्रा में बिक्री) पर निर्भर करता है। लेकिन, अगर आप अपने रिटेल बिजनेस को इतना बड़ा बना सकें कि आप भी होलसेलर जितनी मात्रा में सामान बेच सकें, तो आप बहुत ज़्यादा प्रॉफिट मार्जिन का फायदा उठा पाएंगे।
क्या आप होलसेल और रिटेल दोनों कर सकते हैं?
कई बड़े बिजनेस खुद को सिर्फ होलसेल या रिटेल तक सीमित नहीं रखते। असल में, कई कंपनियां कॉमर्स सप्लाई चेन के हर एक पहलू पर खुद नियंत्रण रखती हैं।
Nike (नाइकी), Cartier (कार्टियर) और Brooklinen (ब्रुकलिनन) ऐसी कंपनियों के बेहतरीन उदाहरण हैं जो यह सब खुद करती हैं। ये कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को खुद डिजाइन करती हैं, उनका निर्माण करती हैं, डिस्ट्रीब्यूशन संभालती हैं और फिर उन्हें होलसेल और रिटेल दोनों माध्यमों से बेचती हैं।
उदाहरण के लिए, Brooklinen (ब्रुकलिनन) ऑनलाइन बेड लिनन बेचने वाले डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (DTC) ब्रांड के रूप में शुरू हुआ। वर्षों में, इसने होलसेल ऑपरेशन में विस्तार किया है और अब हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस को प्रोडक्ट बेचता है।
Shopify पर B2B का इस्तेमाल करके, ब्रांडेड ने एक सहज अनुभव बनाया जहाँ होलसेल खरीदार भी रिटेल ग्राहकों की तरह ही ऑनलाइन बल्क ऑर्डर दे सकते हैं। इससे उन्हें होलसेल और रिटेल, दोनों को एक ही यूनिफाइड बैकएंड से मैनेज करने और अपनी बिक्री बढ़ाने में मदद मिली है।
आज ही Shopify (शॉपिफ़ाई) पर रिटेल और होलसेल के माध्यम से बेचें
यह स्पष्ट है कि होलसेल बेचना किसी भी ऑनलाइन रिटेलर के लिए एक लाभदायक अवसर है। होलसेलर्स वॉल्यूम, दक्षता और मजबूत कस्टमर रिलेशनशिप पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, यह बढ़ते और स्थापित ईकॉमर्स ब्रांड्स के लिए एक शानदार सेल्स चैनल हो सकता है।
Shopify इन्वेंट्री मैनेज करने, बल्क ऑर्डर प्रोसेस करने और कस्टमर्स के साथ रिलेशनशिप बनाए रखने के लिए टूल्स के साथ B2B बिक्री को सुव्यवस्थित करता है। आप अपनी ईकॉमर्स साइट पर पासवर्ड-संरक्षित होलसेल पेज बना सकते हैं और सीधे अन्य बिज़नेस को बेच सकते हैं। या, आप ज़्यादा दर्शकों तक पहुंचने के लिए होलसेल मार्केटप्लेस Faire के माध्यम से ऑनलाइन बल्क में बेच सकते हैं।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको रिटेल सेल्स पूरी तरह छोड़नी होगी। Shopify आपको उसी यूनिफाइड प्लेटफॉर्म पर B2B सेल्स करने की सुविधा देता है जो आपके DTC (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) स्टोर को पावर देता है। एक ही लॉगिन, एक ही इन्वेंट्री सिस्टम और एक ही कस्टमर प्रोफाइल के जरिए आप अपने पूरे बिजनेस और ऑडियंस का 360-डिग्री व्यू पा सकते हैं, चाहे वे ग्राहक कोई भी हों या किसी भी तरीके से खरीदारी कर रहे हों।
"The Conran Shop (द कॉनरन शॉप) जैसे हाई-वैल्यू ब्रांड के लिए, यह [यूनिफाइड कॉमर्स] कस्टमर्स को ऑनलाइन और इन-स्टोर अनुभव के बीच बहुत अधिक सहज तरीके से आगे बढ़ने में सक्षम बनाता है, जबकि पहले यह पूरी तरह से अलग था," The Conran Shop (द कॉनरन शॉप) के डिजिटल डायरेक्टर रिचर्ड वॉयस ने कहा, एक ब्रांड जो Shopify में माइग्रेट हुआ और कन्वर्जन रेट में 54% की वृद्धि देखी जबकि टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप आधी हो गई।
होलसेल बनाम रिटेल से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपने रिटेल बिज़नेस में होलसेल जोड़ना शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
आप अपने मौजूदा ऑनलाइन स्टोर पर पासवर्ड-संरक्षित होलसेल चैनल बनाकर या स्थापित होलसेल मार्केटप्लेस में शामिल होकर शुरू कर सकते हैं। Shopify जैसे प्लेटफॉर्म के साथ, दोनों विकल्प आपको न्यूनतम तकनीकी सेटअप के साथ होलसेल में विस्तार करते हुए अपनी रिटेल उपस्थिति बनाए रखने देते हैं।
मैं होलसेल और रिटेल के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण कैसे संभालूं?
मॉडर्न कॉमर्स प्लेटफॉर्म आपको विभिन्न कस्टमर समूहों के लिए कस्टम प्राइस लिस्ट बनाने की सुविधा देते हैं। उदाहरण के लिए, Shopify के साथ, आप होलसेल कीमतें सेट कर सकते हैं जो केवल लॉग-इन होलसेल कस्टमर्स को दिखाई देती हैं, जबकि रिटेल कस्टमर्स नियमित मूल्य निर्धारण देखते हैं। यह चैनलों में मूल्य स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।
क्या मैं होलसेल और रिटेल प्रदर्शन को अलग से माप सकता/सकती हूँ?
हां, अधिकांश कॉमर्स प्लेटफॉर्म होलसेल और रिटेल प्रदर्शन का अलग से विश्लेषण करने के लिए टूल्स देते हैं। एक ऐसा समाधान खोजें जो आपको दोनों बिज़नेस मॉडल में औसत ऑर्डर वैल्यू, कस्टमर अधिग्रहण लागत और प्रॉफिट मार्जिन जैसे प्रमुख मेट्रिक्स को ट्रैक करने देता है। उदाहरण के लिए, Shopify के रिपोर्टिंग टूल्स इस स्तर का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।
होलसेल या रिटेल खरीदारी बेहतर है?
होलसेल में सामान खरीदना सस्ता पड़ता है क्योंकि आप एक साथ भारी मात्रा में खरीदारी करते हैं, जो बड़े बिजनेस या उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिन्हें ज्यादा स्टॉक चाहिए। वहीं, रिटेल आपको कम मात्रा में सामान खरीदने की आजादी और प्रोडक्ट्स की ढेरों वैरायटी देता है, लेकिन यहाँ प्रति यूनिट कीमत थोड़ी ज्यादा होती है।
Walmart (वॉलमार्ट) एक रिटेलर है या होलसेलर?
Walmart मुख्य रूप से एक रिटेलर है, जो अपने कई स्टोर में सीधे एंड यूज़र को प्रोडक्ट की विशाल रेंज पेश करता है। जबकि Walmart के पास कई आइटम के लिए होलसेल जैसी कीमतें हैं, यह होलसेल बिज़नेस मॉडल में काम नहीं करता है।
रिटेलर या होलसेलर होना बेहतर है?
होलसेल और रिटेल दोनों के अपने नफा-नुकसान हैं। रिटेल आपके लिए तब सबसे अच्छा है जब आप कस्टमर एक्सपीरियंस पर पूरा कंट्रोल, मार्केटिंग की आजादी और हर प्रोडक्ट पर ज्यादा मुनाफा चाहते हैं। वहीं, होलसेल को तब प्राथमिकता दें जब आपके लिए बिजनेस की स्थिरता, मजबूत बिज़नेस रिलेशनशिप और एक साथ बड़े ऑर्डर्स ज्यादा मायने रखते हों।
होलसेल और रिटेल कीमतों के बीच क्या अंतर है?
होलसेल कीमतों में 15-30% प्रॉफिट मार्जिन होता है, जो बल्क में बेचते समय जुड़ता है। रिटेल कीमत इस आंकड़े का लगभग 2.5 गुना है।
होलसेल और रिटेल के बीच मार्जिन क्या है?
होलसेलर्स आमतौर पर 15% से 30% का मुनाफा कमाते हैं जब वे अन्य बिज़नेस को आइटम बेचते हैं। यह आंकड़ा रिटेलर्स के लिए अधिक है जो सीधे कस्टमर्स को बेचते हैं, होलसेल कीमत का लगभग 20% से 50%।


