कृपया ध्यान दें: कुछ लिंक में जानकारी अंग्रेज़ी में हो सकती है।
जब आप कोई बिज़नेस शुरू करते हैं या कोई नया प्रोडक्ट बनाते हैं, तो मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बनाना और अपने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को सुरक्षित रखना बहुत ज़रूरी होता है।
अपने बिज़नेस का नाम और लोगो तय करना इस दिशा में एक अच्छी शुरुआत है लेकिन आपको ट्रेडमार्क प्रोटेक्शन के बारे में भी सोचना चाहिए। इस पोस्ट में जानें कि अपने बिज़नेस के लिए ट्रेडमार्क कब और कैसे लें।
साथ ही, हम ट्रेडमार्क के फायदों पर भी रोशनी डालेंगे और बताएंगे कि आप कानूनन अपने बिज़नेस के किन हिस्सों को सुरक्षित रख सकते हैं।
ट्रेडमार्क के प्रकार
ट्रेडमार्क असल में आपके ब्रांड की वो पहचान है जिससे लोग उसे हज़ारों की भीड़ में पहचान लेते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, यह आपके ब्रांड की वो खासियत है जिसे देखते ही ग्राहक कह सके कि "हां, ये वही असली ब्रांड है"। इसमें आपके ब्रांड के नाम के खास अक्षर (Letters), कोई सिग्नेचर आवाज़ (Sound), लोगो या कोई अनोखा डिज़ाइन शामिल हो सकता है।
भारत में मुख्य रूप से आप दो तरह के ट्रेडमार्क देख सकते हैं: Common law trademarks (जो इस्तेमाल के आधार पर मिलते हैं) या Registered trademarks (जो सरकार से बाकायदा रजिस्टर कराए जाते हैं)।
Common law trademarks (अन-रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क)
आपने बहुत से ब्रैंड नामों और लोगो के बगल में ™ का छोटा सा सिंबल ज़रूर देखा होगा। यह ™ सिंबल इशारा करता है कि वह एक 'अन-रजिस्टर्ड' ट्रेडमार्क है (जिसे कानून की भाषा में 'Common law trademark' भी कहते हैं)।
भारत में इस ™ सिंबल को इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं होती। बस अपने बिज़नेस के नाम या लोगो के साथ काम करना शुरू कर दें, और आपको अपने आप कुछ कानूनी सुरक्षा मिल जाती है। लेकिन ध्यान रहे, इस सिंबल को लगाने से पहले यह अच्छे से चेक कर लें कि आप किसी और के पहले से मौजूद ब्रांड या नाम की नकल तो नहीं कर रहे।
याद रखें, अन-रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के तहत मिलने वाली सुरक्षा बहुत ही सीमित होती है। चूंकि इसमें आपको पूरे अधिकार नहीं मिलते, इसलिए यह तरीका तब तक के लिए ठीक है जब आपने अपना बिज़नेस बस अभी शुरू ही किया हो या आप किसी एक छोटे इलाके में काम कर रहे हों जहां कॉम्पिटिशन बहुत कम है।
जैसे-जैसे आपका बिज़नेस बढ़े, आपको अपनी सुरक्षा पक्की करने के लिए बाकायदा सरकारी रजिस्ट्रेशन (Registered Trademark) करवा लेना चाहिए।
Registered Trademark (रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क)
जैसे अन-रजिस्टर्ड ब्रैंड के साथ ™ लगा होता है, वैसे ही आपने बहुत से बड़े और भरोसेमंद ब्रैंड के नाम के बगल में ® का सिंबल ज़रूर देखा होगा। यह ® सिंबल बताता है कि वह ब्रैंड सरकारी तौर पर रजिस्टर हो चुका है।
एक रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क आपको उस देश में पूरे कानूनी अधिकार और सुरक्षा देता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई 'कॉपीकैट' (नकल करने वाला) आपके लोगो या ब्रैंड नेम का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करता है, तो रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क होने की वजह से आपके पास उसे कोर्ट में घसीटने का पूरा हक होता है।
यह कानूनी सुरक्षा पाने के लिए आपको उन सभी देशों में अपना ट्रेडमार्क रजिस्टर कराना होगा जहां आप बिज़नेस कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि अगर आपका ब्रैंड एक देश (जैसे भारत) में रजिस्टर हो चुका है, तो उस सर्टिफिकेट के आधार पर दूसरे देशों में रजिस्ट्रेशन कराना काफी आसान हो जाता है।
आपके बिज़नेस के लिए ट्रेडमार्क के फायदे
जब आप अपना बिज़नेस चलाते हैं, तो अपने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को सुरक्षित रखने के लिए आप बहुत कुछ कर सकते हैं। ट्रेडमार्क उसी बड़ी तस्वीर का एक अहम हिस्सा है। हालांकि, यह कोई जादुई छड़ी नहीं है, आपको हमेशा इस बात पर नज़र रखनी होगी कि कोई आपके ब्रांड की नकल तो नहीं कर रहा। ट्रेडमार्क आपकी उस मेहनत को एक कानूनी सुरक्षा ज़रूर देता है जो आपने अपने ब्रांड को दूसरों से अलग बनाने में लगाई है।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए कोई कपड़ों का ब्रांड अपनी हुडीज़ पर कोई खास स्लोगन या लोगो प्रिंट करता है। वह उस स्लोगन या इमेज को ट्रेडमार्क के तौर पर रजिस्टर करवा सकता है। इस सुरक्षा के बाद, अगर कोई दूसरा बिज़नेस बिना इजाज़त उनके मार्क की नकल करता है, तो उन पर ट्रेडमार्क उल्लंघन (Infringement) के लिए कोर्ट में केस किया जा सकता है।
चूंकि ट्रेडमार्क प्रोटेक्शन किसी भी अनजान व्यक्ति को आपके ब्रांड के नाम का फ़ायदा उठाने से रोकता है, इससे ग्राहकों का आपके ब्रांड पर भरोसा और बढ़ जाता है। ऊपर दिए गए उदाहरण में ही देखें, तो खरीदारों को पता होगा कि वे 'असली' हुडी ही खरीद रहे हैं, क्योंकि उस ब्रांड का स्लोगन और लोगो ट्रेडमार्क है। यानी उन्हें इस्तेमाल करने का हक सिर्फ उसी बिज़नेस के पास है।
ट्रेडमार्क लेने के 3 आसान स्टेप्स
ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन का असली प्रोसेस इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस देश में रह रहे हैं, लेकिन नीचे दिए गए टिप्स आपको शुरुआत करने में मदद करेंगे। ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन से जुड़े अपने किसी भी पक्के सवाल के जवाब के लिए, सबसे अच्छा यही होगा कि आप किसी सर्टिफाइड ट्रेडमार्क वकील से सलाह लें।
1. पुष्टि करें कि ट्रेडमार्क उपलब्ध है
जब आपके दिमाग में अपने ब्रांड या प्रोडक्ट के नाम के लिए कोई अनोखा आईडिया आए, तो सबसे पहले यह चेक करना ज़रूरी है कि कहीं वह पहले से ही रजिस्टर तो नहीं है। इसे आप अपनी मार्केट रिसर्च का हिस्सा मान सकते हैं। आप जिस भी देश में बिज़नेस करना चाहते हैं, वहां की सरकारी वेबसाइट पर जाकर अपना मनपसंद नाम सर्च करें। भारत से शुरुआत करना सबसे अच्छा है।
भारत में चेक करने के लिए मुख्य डेटाबेस:
- India: IP India Online (Public Search)
- अन्य देश: अगर आप बाहर भी बेचना चाहते हैं, तो अमेरिका के लिए USPTO या ऑस्ट्रेलिया के लिए ATMOSS जैसे डेटाबेस चेक करें।
सर्च करते समय नाम को "Quotation marks" (जैसे "MyBrand") में डालकर सर्च करें ताकि आपको बिल्कुल सटीक (Exact match) नतीजे मिलें। अगर नाम में एक से ज़्यादा शब्द हैं, तो हर शब्द को अलग-अलग भी सर्च करके देखें। इससे आप फालतू के नतीजों में उलझने से बच जाएंगे।
अगर सर्च में आपका चुना हुआ नाम कहीं नहीं दिख रहा, तो यह बहुत अच्छा संकेत है कि वह ट्रेडमार्क आपको मिल सकता है।
अगर सर्च में वह नाम दिख भी जाए, तो इसका मतलब यह नहीं कि बात खत्म हो गई। भारत में भी ट्रेडमार्क बनाए रखने के लिए उसका लगातार इस्तेमाल (Use) होना ज़रूरी है। अगर कोई नाम रजिस्टर तो है लेकिन पिछले 5 सालों से इस्तेमाल नहीं हो रहा, तो आप एक ट्रेडमार्क वकील की मदद से उसे चुनौती दे सकते हैं और अपने बिज़नेस के लिए उसे हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, हो सकता है किसी ने वह नाम रजिस्टर कराया हो लेकिन अब उनका बिज़नेस बंद हो चुका हो। ऐसे में वह नाम फिर से खाली हो सकता है।
सरकारी डेटाबेस के बाद, वही नाम Google पर सर्च करके देखें। देखें कि वहां कौन सी साइट्स आ रही हैं और वे कितनी एक्टिव हैं। आखिर में, Instagram, Facebook और LinkedIn जैसे सोशल मीडिया पर भी सर्च करें।
आप Namechk जैसे टूल्स का इस्तेमाल करके यह देख सकते हैं कि उस नाम से कोई प्रोफाइल पहले से तो नहीं बनी है। अगर वहां भी कुछ हालिया (Recent) एक्टिविटी नहीं मिलती, तो समझो आपके लिए रास्ता साफ़ है!
Namechk जैसे उपकरण आपको यह देखने में मदद कर सकते हैं कि आपका चुना गया शब्द या वाक्य सोशल मीडिया या वेबसाइटों पर उपयोग हो रहा है या नहीं।
2. आधिकारिक तौर पर ट्रेडमार्क रजिस्टर करवाएं
जब आप अपना ट्रेडमार्क पक्का करने के लिए तैयार हों, तो किसी प्रोफेशनल ट्रेडमार्क वकील से ज़रूर सलाह लें जो आपके बिज़नेस के हिसाब से सही कानूनी जानकारी दे सके। रजिस्ट्रेशन के लिए अपना कीमती समय और पैसा लगाने से पहले, उनके साथ मिलकर एक बार फिर से अच्छी तरह 'पब्लिक सर्च' कर लें ताकि बाद में कोई दिक्कत न आए।
भारत में सिर्फ एक सर्टिफाइड वकील ही आपको सही मायने में बता पाएगा कि इस वक्त ट्रेडमार्क के लिए अप्लाई करना सही है या नहीं। सरकारी पोर्टल पर अपना 'मार्क' रजिस्टर करने और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हासिल करने का पूरा प्रोसेस काफी तकनीकी होता है। इसमें सरकार की तरफ से 'Examination Report' आना या किसी और ब्रांड द्वारा विरोध जताने जैसी चीज़ें शामिल हो सकती हैं। इसलिए, इस काम को किसी एक्सपर्ट को सौंपना ही सबसे समझदारी भरा फैसला है ताकि आपका काम बिना किसी रुकावट के हो जाए।
याद रखें: ट्रेडमार्क फाइल करने का तरीका हर देश में अलग होता है। अगर आप भारत के बाहर भी अपना सामान बेचना चाहते हैं, तो ऐसे एक्सपर्ट की सलाह लें जो इंटरनेशनल रजिस्ट्रेशन (जैसे Madrid Protocol) की ज़रूरतों को अच्छी तरह समझता हो।
3. अपने ट्रेडमार्क की सुरक्षा करें
ट्रेडमार्क की सुरक्षा पक्की करने का मतलब है कि आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा:
- अपने ट्रेडमार्क का लगातार इस्तेमाल करें, यानी उस नाम या लोगो के साथ अपना बिज़नेस चालू रखें।
- नकल होने पर तुरंत एक्शन लें, अगर कोई आपके ब्रांड की चोरी करता है, तो उसे हल्के में न लें।
- सही सिंबल का इस्तेमाल करें, अन-रजिस्टर्ड ब्रैंड्स के लिए ™ और सरकारी तौर पर रजिस्टर होने के बाद ® का इस्तेमाल ज़रूर करें।
अपने ट्रेडमार्क को सुरक्षित रखने का मतलब सिर्फ सिंबल लगाना नहीं है। आपको बाज़ार में इस बात पर भी नज़र रखनी होगी कि कोई आपके ब्रांड की नकल तो नहीं कर रहा या आपके जैसा ही मिलता-जुलता नाम तो इस्तेमाल नहीं कर रहा।
ट्रेडमार्क कानून में एक बात बहुत ज़रूरी है, अगर आप अपने ब्रांड की नकल रोकने के लिए कदम नहीं उठाते, तो धीरे-धीरे आपका उस नाम पर से हक खत्म हो सकता है (जिसे कानून में 'Dilution' कहते हैं)। इसे एक उदाहरण से समझें: अगर कोई आपके जैसा ही ब्रांड या नाम लेकर मार्केट में आ जाए, तो तुरंत अपने वकील से बात करें। ज़्यादातर मामलों में, वकील उस नकल करने वाले को कानूनी नोटिस भेजकर आपकी तरफ से मामला सुलझा लेते हैं और आपके ब्रांड को सुरक्षित रखते हैं।
ट्रेडमार्क में होने वाला खर्च
भारत में ट्रेडमार्क का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप एक अकेले व्यक्ति (Individual/Startup) के तौर पर अप्लाई कर रहे हैं या एक बड़ी कंपनी के तौर पर। 2024-2026 के सरकारी आंकड़ों के हिसाब से भारत में इसकी फीस कुछ इस तरह है:
अकेला व्यक्ति/स्टार्टअप/MSME: अगर आप अकेले मालिक हैं या आपका स्टार्टअप रजिस्टर है, तो सरकारी फीस ₹4,500 (ऑनलाइन फाइलिंग के लिए) है।
अन्य (बड़ी कंपनियां/पार्टनरशिप): इनके लिए सरकारी फीस ₹9,000 है।
ध्यान रहे: अगर आप कागज़ी फॉर्म (Physical filing) जमा करते हैं, तो यह फीस थोड़ी ज़्यादा होती है, इसलिए ऑनलाइन फाइलिंग ही बेहतर है।
क्लास के हिसाब से खर्च: यह फीस हर 'क्लास' के लिए अलग से देनी होती है। मान लीजिए आप अपने ब्रांड के नाम से कपड़े भी बेचना चाहते हैं (Class 25) और जूतों का बिज़नेस भी करना चाहते हैं (Class 25 में ही आता है), तो आपको एक ही फीस देनी होगी। लेकिन अगर आप कपड़ों के साथ-साथ रेस्टोरेंट (Class 43) भी खोलना चाहते हैं, तो आपको दो अलग-अलग क्लास के लिए फीस देनी होगी (यानी ₹4,500 + ₹4,500 = ₹9,000)।
वकील या प्रोफेशनल की फीस: सरकारी फीस के अलावा आपको वकील या एजेंट की फीस भी देखनी होगी, जो आपकी एप्लीकेशन फाइल करने और सरकारी आपत्तियों का जवाब देने में मदद करते हैं। यह फीस ₹3,000 से लेकर ₹15,000 या उससे ज़्यादा भी हो सकती है, जो वकील के अनुभव पर निर्भर करता है।
अपनी ट्रेडमार्क सुरक्षा बनाए रखना
रिन्यूअल के नियम और समय-सीमा
भारत में भी ट्रेडमार्क की वैलिडिटी 10 साल की होती है। अपने ब्रांड पर अपना हक 10 साल के बाद भी बनाए रखने के लिए, आपको इसे रिन्यू करवाना पड़ता है और सरकार को दोबारा रिन्यूअल फीस देनी होती है।
समय का खास ध्यान रखें: आप अपने ट्रेडमार्क के खत्म होने से 6 महीने पहले रिन्यूअल की एप्लीकेशन डाल सकते हैं। अगर आप 10 साल पूरे होने से पहले इसे रिन्यू नहीं करवाते, तो आपको लेट फीस के साथ इसे भरने के लिए कुछ समय और मिलता है। लेकिन अगर तब भी कुछ न किया जाए, तो सरकारी रजिस्टर से आपका नाम हटा दिया जाता है और फिर कोई भी उस नाम को चुरा सकता है।
इस्तेमाल का सबूत: अमेरिका की तरह भारत में 5वें साल में कोई अलग से डिक्लेरेशन फाइल करने की ज़रूरत तो नहीं होती, लेकिन एक बात बहुत ज़रूरी है, अगर आपका ट्रेडमार्क रजिस्टर है और आप इसे लगातार 5 साल और 3 महीने तक इस्तेमाल नहीं करते, तो कोई भी दूसरा व्यक्ति कोर्ट या रजिस्ट्री में इसे कैंसल करने की अर्जी दे सकता है। वह कह सकता है कि "यह ब्रांड तो सिर्फ नाम का है, काम का नहीं।"
इसलिए, अपने ट्रेडमार्क को बचाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप उस नाम से अपना बिज़नेस और बिलिंग चालू रखें।
अपने ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन को अपडेट करना
10 साल का समय काफी लंबा होता है और इस दौरान बिज़नेस का रास्ता बदलना बहुत ही आम बात है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी ने अगरबत्ती के ब्रांड नाम के लिए ट्रेडमार्क लिया। अब जैसे-जैसे बिज़नेस बढ़ा, उसी नाम से परफ्यूम और साबुन भी बेचे जाने लगे।
भारत में भी, अगर आप अपने ब्रांड के इस्तेमाल के तरीके में कोई बदलाव करते हैं, तो आपको अपने ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन को अपडेट करना ज़रूरी होता है। ऊपर वाले उदाहरण में, अगरबत्ती 'Class 3' में आती है, लेकिन अगर आप उसी नाम से 'धूप' या 'मोमबत्तियां' (Class 4) भी बेचना चाहते हैं, तो आपको एक नई एप्लीकेशन (Form TM-A) फाइल करनी होगी।
ध्यान रखने वाली बात: भारत में एक बार रजिस्टर हुए ट्रेडमार्क में आप नए प्रोडक्ट्स या क्लास सीधे नहीं जोड़ सकते। अगर आपका बिज़नेस बढ़ रहा है और आप नई कैटेगरी में कदम रख रहे हैं, तो आपको उस नई क्लास के लिए अलग से अप्लाई करना होगा।
यही नियम तब भी लागू होता है जब आप पुराने प्रोडक्ट्स बेचना बंद कर देते हैं। अगर वह कंपनी अब सिर्फ साबुन बेच रही है और अगरबत्ती बंद कर दी है, तो उन्हें अपने रजिस्ट्रेशन में बदलाव (Amendment) के लिए Form TM-M फाइल करना चाहिए। इससे आपका ब्रांड कानूनी तौर पर सुरक्षित रहता है और कोई दूसरा यह दावा नहीं कर सकता कि आप उस नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
ट्रेडमार्क का लगातार इस्तेमाल क्यों ज़रूरी है?
ट्रेडमार्क कानून कहता है कि कानूनी सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपने ब्रांड नेम या लोगो का लगातार इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है। अगर कोई दूसरा बिज़नेस वही नाम अपने लिए चाहता है, तो वे कानूनी तौर पर आपके ट्रेडमार्क को चुनौती दे सकते हैं। अगर वे ट्रेडमार्क रजिस्ट्री या कोर्ट में यह साबित कर दें कि आप उस नाम का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो वे आपका ट्रेडमार्क कैंसिल करवा सकते हैं और खुद उसे हासिल कर सकते हैं।
भारत में इस्तेमाल का नियम: अमेरिका की तरह यहां हर 6 महीने में एक्सटेंशन लेने का सिस्टम तो नहीं है, लेकिन भारत में एक बहुत बड़ा जोखिम है इस्तेमाल न करना। अगर आपका ट्रेडमार्क रजिस्टर हो गया है और आप उसे लगातार 5 साल और 3 महीने तक इस्तेमाल नहीं करते (यानी कोई बिलिंग या मार्केटिंग नहीं करते), तो कोई भी तीसरा व्यक्ति 'Rectification' की अर्जी डालकर आपका नाम हटवा सकता है।
शुरुआत में देरी हो तो क्या करें? अगर आपने ट्रेडमार्क के लिए अप्लाई कर दिया है लेकिन आपका प्रोडक्ट अभी तैयार नहीं है, तो आप एप्लीकेशन में ‘भविष्य में इस्तेमाल करने का इरादा’ का ऑप्शन चुन सकते हैं। लेकिन एक बार रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद, आपको जल्द से जल्द उस नाम से बिज़नेस शुरू कर देना चाहिए।
खर्च और झंझट से बचें: भारत में एक बार ट्रेडमार्क 'Objected' या 'Opposed' (किसी के विरोध करने पर) हो जाए, तो वकीलों की फीस और सरकारी चक्करों में काफी पैसा खर्च हो सकता है। इसलिए सबसे अच्छा यही है कि आप सिर्फ उन्हीं नामों या लोगो के लिए ट्रेडमार्क लें जिन्हें आप वाकई इस्तेमाल करने वाले हैं। फालतू में कई सारी 'क्लासेज़' में रजिस्टर कराके छोड़ देने से सिर्फ आपका खर्च बढ़ेगा और सुरक्षा भी पक्की नहीं रहेगी।
ट्रेडमार्क का ख्याल न रखने के अंजाम
ट्रेडमार्क खोने का मतलब है कि अब आप अपने उस लोगो या ब्रांड नेम पर अपना हक नहीं जता सकते जिसे आपने खुद खड़ा किया था। अगर आपके ही फील्ड के दूसरे बिज़नेस भी वही नाम या निशान इस्तेमाल करने लगें, तो आपके ब्रांड की वो 'खास पहचान' खत्म हो जाती है जिससे लोग आपको पहचानते हैं।
अगर ऐसा होता है और आप समय रहते कोई कदम नहीं उठाते, तो आप अपना कानूनी अधिकार खो सकते हैं। याद रखें, ट्रेडमार्क लेने में जो मेहनत और पैसा आपने लगाया है, उसे बचाने के लिए नकल करने वालों के खिलाफ एक्शन लेना बहुत ज़रूरी है। वरना आपकी पूरी इन्वेस्टमेंट बेकार जा सकती है।
अपने ट्रेडमार्क की रक्षा करना या दूसरों की गलत 'ट्रेडमार्क एप्लीकेशन' को कोर्ट में चुनौती देना ये ऐसे काम हैं जिन्हें वकीलों पर ही छोड़ देना बेहतर है। आपका असली काम है अपने बिज़नेस को बढ़ाना और बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाना। इसलिए आप अपने काम पर फोकस करें और अपने ब्रांड की सुरक्षा की जिम्मेदारी भरोसेमंद ट्रेडमार्क वकीलों को सौंप दें
ट्रेडमार्क कैसे लें - अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ट्रेडमार्क क्या है?
ट्रेडमार्क असल में आपके ब्रांड की एक पहचान है। मार्केट में ऐसी कोई भी चीज़ जो आपके प्रोडक्ट या ब्रांड को दूसरों से अलग बनाती है, उसे पहचान का जरिया माना जा सकता है। इसमें अक्षरों का कोई अनोखा मेल, कोई खास आवाज़, कोई लोगो या डिज़ाइन शामिल हो सकता है जो आपके ब्रांड को एक अलग और खास पहचान देता है।
रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क क्या है?
रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क वह होता है जो सरकारी तौर पर ट्रेडमार्क ऑफिस में रजिस्टर कराया जा चुका हो। इसे अक्सर ® सिंबल के साथ दिखाया जाता है, जिससे यह साफ़ हो जाता है कि इस ब्रांड नेम या लोगो को कानूनी सुरक्षा मिल चुकी है।
ट्रेडमार्क क्यों ज़रूरी हैं?
खुद को, अपने ब्रांड को, अपने आइडियाज़ और अपनी मेहनत से बनाई गई चीज़ों को सुरक्षित रखना बहुत ज़रूरी है। यही वो चीज़ें हैं जो आपके बिज़नेस या पर्सनल ब्रांड को दूसरों से अलग और खास बनाती हैं। ट्रेडमार्क जैसी सुरक्षा के बिना, कोई भी आपके काम की नकल कर सकता है या उसे चुरा सकता है। जब आप इसके मालिक बन जाते हैं, तो आपको एक तय समय के लिए उस मार्क (नाम या लोगो) को इस्तेमाल करने का एक्सक्लूसिव हक मिल जाता है। साथ ही, अगर कोई आपके आइडियाज़ की चोरी करता है, तो ट्रेडमार्क आपको उस पर कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार भी देता है।
कॉपीराइट और ट्रेडमार्क में क्या अंतर है?
कॉपीराइट और ट्रेडमार्क कुछ हद तक एक जैसे लगते हैं। ये दोनों ही आपके आइडियाज़ और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को सुरक्षित रखने के तरीके हैं। इनमें आपके प्रोडक्ट्स जैसी ठोस चीज़ें भी हो सकती हैं और बिज़नेस आइडियाज़ या काम करने के तरीके जैसी चीज़ें भी।
आसान शब्दों में कहें, तो कॉपीराइट कला और साहित्य (जैसे आर्ट, किताबें या गाने) के लिए होता है, जबकि ट्रेडमार्क आमतौर पर एक ब्रांड की पहचान (जैसे ब्रांड का नाम, लोगो आदि) को सुरक्षित रखने के लिए होता है। इन दोनों को लेने के नियम और सरकारी रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस बिल्कुल अलग-अलग होता है।
मैं ट्रेडमार्क कैसे रजिस्टर करा सकता/सकती हूं?
अपने देश के ट्रेडमार्क ऑफिस (IP India) से संपर्क करके यह पता करें कि एप्लीकेशन शुरू करने के लिए कौन से कागजात और कितनी फीस लगेगी। इसके साथ ही, किसी ऐसे वकील से सलाह लेना सबसे अच्छा रहता है जो ट्रेडमार्क कानून का एक्सपर्ट हो और जिसे भारत में रजिस्ट्रेशन के सरकारी प्रोसेस की पूरी जानकारी हो।
ट्रेडमार्क की सुरक्षा कितने समय तक रहती है?
भारत में भी एक बार रजिस्टर होने के बाद ट्रेडमार्क 10 साल के लिए वैलिड रहता है। इस 10 साल की मियाद पूरी होने पर आपको अपने कानूनी हक को आगे बढ़ाने के लिए रिन्यूअल की अर्जी देनी होगी। आप इसे हर 10 साल में रिन्यू कराकर हमेशा के लिए अपना बना कर रख सकते हैं।
अगर आपका ट्रेडमार्क रजिस्टर है लेकिन आप इसे लगातार 5 साल और 3 महीने तक बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करते, तो कोई भी दूसरा व्यक्ति इसे कैंसल करने की मांग कर सकता है। इसलिए अपनी कानूनी सुरक्षा बनाए रखने के लिए ब्रांड का इस्तेमाल और उसकी रक्षा करना दोनों बहुत ज़रूरी हैं।
क्या मैं किसी नाम या वाक्य को ट्रेडमार्क करा सकता/सकती हूं?
हां, ट्रेडमार्क मालिक नामों और वाक्यों की सुरक्षा कर सकता है। लोकप्रिय उदाहरणों में व्यापारिक नाम, टैगलाइन, नारे, और प्रोडक्ट नाम शामिल हैं।


